कार्तिक पूर्णिमा

Nov 17, 2023 - 21:45
Nov 18, 2023 - 17:22
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कार्तिक पूर्णिमा
कार्तिक पूर्णिमा

कार्तिक पूर्णिमा :

कार्तिक पूर्णिमा, हिन्दू पंचांग के कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला एक हिन्दू त्योहार है। यह त्योहार सामान्यत: अक्टूबर या नवम्बर महीने में पड़ता है। कार्तिक पूर्णिमा हिन्दू धर्म में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र दिन माना जाता है, और भारत के विभिन्न क्षेत्रों और परंपराओं में इसका महत्व है।

कार्तिक पूर्णिमा पर, भक्तजनों का सामान्यत: पवित्र नदियों, खासकर गंगा, में स्नान करना एक धार्मिक आचरण है। इसका मतलब है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करके आत्मा को शुद्धि मिलती है और आध्यात्मिक शुद्धि होती है। कई लोग इस दिन भगवान शिव, भगवान विष्णु, या अन्य देवताओं की पूजा करते हैं, जो उनके क्षेत्रीय परंपराओं पर निर्भर करता है।

कुछ क्षेत्रों में, कार्तिक पूर्णिमा को दीपों और दियों (तेल के दीपक) को प्रकाशित करने के साथ जोड़ा जाता है। भक्तजन इन दीपों को प्रजान के आस-पास और उनके घरों में रखते हैं, जो प्रकाश के अंधकार पर और बुराई पर अच्छाई और सत्य की जीत को प्रतिष्ठानित करता है।

देव दीपावली :

 "देव दीपावली" एक हिन्दू त्योहार है जो कार्तिक पूर्णिमा को मनाया जाता है, जो हिन्दी कैलेंडर के कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को आता है। यह त्योहार वाराणसी में विशेष रूप से मनाया जाता है और इसे "देव दीपावली" कहा जाता है क्योंकि इसे देवताओं के बड़े आत्माता का आगमन माना जाता है।

इस त्योहार के मुख्य आयोजन में शाम को गंगा घाटों पर आयोजित होने वाले गंगा आरती को महत्वपूर्ण माना जाता है। गंगा आरती के दौरान बड़ी संख्या में दीपों को जलाया जाता है और इससे एक आत्मिक और धार्मिक माहौल बनता है।

कुछ अन्य महत्वपूर्ण प्रथाएं और आयोजन इस त्योहार के दौरान होते हैं:

  1. समुद्र मंथन की मिमिक्री: इस दिन गंगा नदी को अमृत (नेक्टर) में बदलने की कथा को याद करते हुए, लोग समुद्र मंथन की कथा का मिमिक्री आयोजित करते हैं।

  2. गंगा स्नान: भक्तजन गंगा नदी में स्नान करने के लिए समर्थानुबंधित होते हैं, जिसे वे आत्मा शुद्धि के रूप में मानते हैं।

  3. भंडारा और पूजा: गंगा घाटों पर भंडारे और पूजा का आयोजन होता है, जिसमें विशेष प्रकार के प्रसाद बाँटे जाते हैं।

  4. प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रम: इस अवसर पर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रदर्शनी होती हैं, जिसमें संगीत, नृत्य, और अन्य पारंपरिक कलाएं शामिल होती हैं।

कार्तिक पूर्णिमा का महत्व : कार्तिक पूर्णिमा का महत्व हिन्दू धर्म में अत्यधिक माना जाता है और इसे विभिन्न रूपों में मनाया जाता है। यहां कुछ कार्तिक पूर्णिमा के महत्वपूर्ण पहलुओं का वर्णन है:

  1. स्नान का महत्व: कार्तिक पूर्णिमा को गंगा नदी और अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने का विशेष महत्व है। इसे गंगास्नान माना जाता है और इसे आत्मा की शुद्धि का संकेत माना जाता है।

  2. दीपदान का रहस्य: कार्तिक पूर्णिमा पर दीपों और दियों को जलाने का अभिष्ट फल माना जाता है। लोग अपने घरों और मंदिरों को दीपों से सजाते हैं, जिससे अंधकार को दूर करके प्रकाश को प्रोत्साहित किया जाता है।

  3. कर्मकांड का त्याग: कार्तिक पूर्णिमा को कर्मकांड का त्याग करके आत्मा की शुद्धि और मुक्ति की प्राप्ति का अवसर माना जाता है। इस दिन लोग व्रत रखकर ध्यान और पूजा में लगे रहते हैं।

गुरुनानक जयंती :

गुरुनानक जयंती, जिसे आमतौर पर गुरु पूरब भी कहा जाता है, कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। यह एक महत्वपूर्ण सिख धर्मी त्योहार है जो गुरुनानक देव जी के जन्मदिन को याद करने के लिए मनाया जाता है। गुरुनानक जी, सिख धर्म के पहले गुरु थे और सिखों के संस्थापक थे।

गुरुनानक जयंती के दिन, सिख समुदाय के लोग गुरुद्वारे (सिखों के धार्मिक स्थान) में इकट्ठे होते हैं और धार्मिक आचरणों में भाग लेते हैं। धर्मिक कीर्तन, कथा, और प्रवचन होते हैं, और लोग गुरुद्वारे में प्रशाद (धार्मिक भोजन) बाँटते हैं।

गुरुनानक जी के सिखों का मूल उद्देश्य सच्चे भगवान की पूजा करना और मानवता में भलाई की सेवा करना था। इसलिए, इस दिन पर सिख समुदाय धर्मिक साधना, ध्यान, सेवा, और एकता के माध्यम से अपने आदर्शों का समर्थन करता है।

गुरुनानक जयंती का अद्भुत माहौल होता है, और यह सिख समुदाय के लोगों के बीच एक बड़े धार्मिक और सामाजिक उत्सव का रूप धारण करता है।

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Madhuri Mahto I am self dependent and hard working. Knowledge sharing helps to connect with others , It is a way you can give knowledge without any deprivation.